कागज के फूल का गीत, गीतादत्त द्वारा गया हुआ
वक्त ने किया क्या हसीं सितम,
तुम रहे ना तुम, हम रहे ना हम..
बेक़रार दिल, इस तरह मिले,
जिस तरह कभी हम जुदा न थे..
तुम भी खो गए, हम भी खो गए..
एक राह पर चल के दो कदम..
वक्त ने किया क्या हसीं सितम,
तुम रहे ना तुम, हम रहे ना हम..
जायेंगे कहाँ, सूझता नहीं..
चल पड़े मगर, रास्ता नहीं..
क्या तलाश है, कुछ पता नहीं..
बुन रहे हैं दिन, ख़्वाब दम-बदम
वक्त ने किया क्या हसीं सितम,
तुम रहे ना तुम, हम रहे ना हम..
4 comments: